श्रीराम जन्म कथा

 श्रीराम जन्म कथा

 

श्रीरामाचा अवतार   दुष्टांचा करण्या संहार

जन्म घेतला पृथ्वीवर   परमेश्वरानी  //१//

रामासी लाभले मोठेपण   तयाठायीं तन मन धन

अर्पिती सर्व भक्तजन   प्रेमभरे    //२//

थोर ग्रंथ रामायण  त्यातील जन्मकथा निवडून

करीत असे अर्पण   तुमचेसाठीं   //३//

लंकाधीपती रावण   होता शिवभक्त महान

उन्मत्त झाला वर पावून   त्रास देई सर्वाना   //४//

युद्ध केले स्वर्गासी   बंदी केले देवांसी

छळूं लागला तयांसी   दुष्टपणानें   //५//

रावणाच्या त्रासा पोटीं   देवांच्या मुक्तीसाठीं

अवतार घेई जगत् जेठी   श्रीराम जन्म घेऊनी   //६//

आयोध्येचा दशरथ राजा   आनंदी होती प्रजा

सुखी बघण्यात मजा   त्यास वाटे   //७//

एक दुःख होते त्यास   पुत्राविना जात दिवस

पुत्र प्राप्त करण्यास   प्रयत्न केले बहूत //८//

राजा जाई वशिष्ठ गुरु कडे   घालूनी त्यास साकडे

पुत्राविना वंश न वाढे   मार्ग सुचवावा   //९//

वशिष्ठ गुरु सुचविती   यज्ञ करण्या सांगती

पुत्रकामेष्टी यज्ञ महती   आगीच असे   //१०//

गुरुंचा आशिर्वाद घेऊनी    राजा निघाला तेथून

संकल्प केला दशरथांनी   पुत्रकामेष्टी यज्ञाचा   //११//

श्रृंगऋषी महान   होते तप सामर्थवान

विनवितसे जाऊन   त्यांचे आश्रमी   //१२//

पाद्यपुजा त्यांची करुनी   भक्तिभावे विनवूनी

यज्ञासाठीं पाचारण करुनी   तयासी बोलावले   //१३//

मंडव घातला भला   यज्ञाचा भव्य सोहळा

ऋषीगण ब्राह्मण सगळा   यज्ञासी जमती   //१४//

यज्ञांत आवाहन केले   सर्व देव निमंत्रिले

हविर्भाव सर्वासी दिले   श्रृंगऋषीनें   //१५//

स्पष्ट मंत्रोपचार म्हणून   सर्व ऋषी एकसूर धरुन

अग्नीसी टाकती हवन   राजा दशरथ   // १६//

प्रसन्न झाली यज्ञदेवता   पायस कलश हातीं देता

समान भाग राण्यांस वाटता   पुत्र प्राप्त होई   //१७//

दशरथाच्या राण्या तीन   कौसल्या सुमित्रा नि कैकयी लहान

आनंदी झाल्या पायस बघून   यज्ञाचा प्रसाद   //१८//

कैकयी बसली रुसून   पट्टराणी मी लहान असूनी

प्रथम भाग कौसलेस देवून   अपमान माझा होई   //१९//

प्रसाद घेवूनी बैसली   मनीं विचार करुं लागली

तत् क्षणी एक घार आली   प्रसाद जाई घेऊन   //२०//

सर्वजण होती चकीत   कांही समजण्याचे आंत

एक भाग घार नेत   आकाशी उडाली   //२१//

कैकयी झाली दुःखी    शब्द निघेना मुखी

प्रसंग ओडावला एकाएकीं     तिचेवर   //२२//

आपल्या प्रसादातील भाग   देवून कैकयीस सांग

सोडून द्यावा तुझा राग   विनवितसे दोन्ही राण्या  //२३//

चैत्रशुद्ध नवमीला   राम जन्म झाला

कौसल्या मातेला   आनंद होई त्रिभुवनी   //२४//

सुमित्रेचा लक्ष्मण   कैकयीस भरत शत्रुघ्न

चार पुत्र मिळून   पितृत्व दिले दशरथासी   //२५//

आदर्श जीवन जगला   पितृआज्ञे वनवास सोसला

मारिले दुष्ट रावणाला   यशस्वी केले रामराज्य   //२६//

रामाचा महीमा थोर   परमेश्वराचा तो अवतार

भक्तांचा करी उद्धार    त्याचे आशिर्वादे    //२७//

एक पत्नी, वचनी, बाणी    सत्य आणि  प्रेमळ वाणी

अद्वितीय गुणांच्या खाणी    रामासी ठरवी पुरुषोत्तम   //२८//

रामाचे जीवन भव्य   आदर्शमय ते काव्य

दाखवोनी जगाला दिव्य    ठाव घेई सर्वा मना   //२९//

रामनामी मोठेपण   जाईल तो उद्धरुन

संकटे जात निघून   आठवण येता त्याची   //३०//

रामरक्षा स्तोत्र पठण   करी तुमचे देह रक्षण

नित्य नियमें वाचन    मनोभावें   //३१//

” शुभं भवतु “

डॉ. भगवान नागापूरकर

९००४०७९८५०

2 responses to “श्रीराम जन्म कथा

    • श्रीरामजन्मकथा तर छानच आहे. कारण ती थोर कवी वाल्मिकीली सांगीतली.
      तुम्हाला माझी कविता आवडली ना ? त्यासाठी माझे धन्यवाद
      डॉ. भगवान नागापूरकर
      ९००४०७९८५०

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